Wednesday, October 1, 2008

दर्द से दहशत तक



गुरुवार शाम एक मित्र का ई-मेल मिला। मेल में भेजे फोटोग्राफ को देख काफी हैरानी हुई। नवरात्र की बधाई के साथ `ये है मां की शक्ति´ लिखे मैसेज के साथ मिले इस मेल में अपने बच्चे को बचाने के लिए एक कुत्ते से गिलहरी की लड़ाई दिखाई गई है। सचमुच ये मां की शक्ति ही है कि बहुत भोले स्वभाव की मानी जाने वाली गिलहरी अपने बच्चे की जान बचाने के लिए एक खूंखार कुत्ते से जा भिड़ी और अपने बच्चे को सुरक्षित बचा भी लाई।
पिछले मंगलवार तड़के पुलिस ने एक ऐसी महिला को धर दबोचा, जो घरों और वाहनों में आग लगाकर दहशत फैला रही थी। उस घटना को भी ’यादा दिन नहीं हुए, जब जयपुर की ही एक महिला बलि देने के लिए अपनी ही रिश्तेदार के बच्चे का अपहरण करने के जुर्म में पकड़ी गई थी। इन दोनों ही घटनाओं में एक बात समान थी। वो यह कि मां बनने की चाह में दोनों महिलाएं जुनून की इस हद तक उतर गईं कि वे अपराध के गर्त में जा पहंुचीं।
`मां की शक्ति´ नामक उस मेल और इन दोनों घटनाओं से मन में कई सवाल उठे। शायद एक औरत के लिए मां बनना बहुत मायने रखता है। मातृत्व से जहां कमजोर शरीर में भी शक्ति आ गई, वहीं मां बनने की चाह में चूल्हा-चौका करने वाली इन साधारण-सी महिलाओं में अपहरण करने और 50 की उम्र में सुबह चार बजे दीवारें फांदने की हिम्मत पैदा कर दी। इन महिलाओं का राज खुलने के बाद सभी ने चैन की सांस ली। जिनका बच्चा मिला, वो मां-बाप अब तक मंदिरों की चौखट चूम रहे हैं। सभी पुलिस और भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। बच्चे की चाह में तांत्रिकों के जाल में फंसी औरतें अपराध की राह चुन रही हैं। इनमें से कुछ पकड़ी जा चुकी हैं तो कुछ आंखों पर अंधविश्वास की पट्टी बांध अपनी गोद हरी होने का इंतजार कर रही हैं। ऐसी महिलाओं के लिए हर किसी की आंखों में नफरत है। बच्चे की चाह में इन महिलाओं ने जो राह चुनी, निस्संदेह वो अपराध है, लेकिन परदे के पीछे झांकने की एक कोशिश तो होनी ही चाहिए। क्या सिर्फ बेऔलाद होना ही इन्हें जुनून की हद तक ले गया?
इनमें से एक महिला की परिचित मीनू से मुलाकात हुई तो उनकी बातें आंखें नम कर देने वाली थीं। मीनू बताती हैं, मेरे बच्चे जब पेंसिल से घर की दीवारें खराब करते हैं तो कई बार गुस्से में उनकी पिटाई भी कर देती हूं, लेकिन जब वो हमारे घर आती थी तो उन खराब दीवारों पर हाथ फेरकर खुश होती रहती थी। उसका चेहरा बयां करता था कि काश, उसके घर भी दीवारें खराब करने वाला कोई हो। बेऔलाद होना ही बहुत बड़ा दुख है, लेकिन जब खुद के सगे-संबंधी ही `बांझ´ और `मनहूस´ कहकर किसी शुभ काम में उन्हें शामिल नहीं करें। अपने बच्चों पर उनकी छाया तक न पड़ने दें तो ऐसा व्यवहार उन्हें महसूस करवाता है कि जैसे मां ना बन पाना कोई पाप हो। इसी पाप से मुक्ति के लिए वो जुनून की हद तक पहुंच जाती हैं। एक दर्द है, जो उन्हें दहशत के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर देता है। इस दर्द को समझना जरूरी है। संतान सुख के लिए अपनाया गया उनका रास्ता गलत है, लेकिन उपेक्षित व्यवहार कर उन्हें निसंतान होने पर अपराधबोध का अहसास करवाने वाले भी तो इस बड़े पाप के भागी ही हैं।
नवरात्र हैं तो सिर्फ देवी का पूजन करना ही काफी नहीं है। हर स्त्री के सम्मान का संकल्प लें, चाहे वे मां हो या नहीं भी। साथ ही बेटियों का अर्चन भी सिर्फ इन्हीं दिनों नहीं, बल्कि हर पल हो तो आदिशक्ति अवश्य प्रसन्न होंगी।

12 comments:

Naazkalra said...

Dileepraaj ji namskaar !t apka lekh accha laga padhkar, agar wo email jiska jikr apne kiya hai, apke inbox me ho to mujhe bhi jarur bhejiyega. meri ek problem solve karenge? mai apne blog par 500 se jyada word type nahi kar pa raha hun, adhura blog pura karta hun to adhura part pahle show ho jata hai. kuch settings batayenge plz. my email naazkalra@gmail.com thanx.

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रश्मि प्रभा said...

bahut hi achha likha hai.....
ise maine dil se mahsoos kiya
sashakt lekhni ki badhaai

प्रदीप मानोरिया said...

सुंदर आलेख आपका स्वागत है

rakhshanda said...

अच्छा लिखा है...आगे भी लिखते रहें...हम पढने आते रहेंगे.

shama said...

Dard se Dahshat tak"...Khayalat behad pasand aaye. Is deshme nareeko devi kehke daasi mana hai...ladkiyonko bojh mana hai, paraya dhan samajha hai. Navraatrime kanjakayonko bhog chadhaneka kewal riwajan hota hai!Itne achhe lekhke liye badhai ho!

BrijmohanShrivastava said...

बहुत कम आयु में मन की परतें खोल रहे हो और वह भी इतने सशक्त ढंग से =बहुत अच्छा लगा

प्रदीप मानोरिया said...

श्रीमान आपका मेरे ब्लॉग पर पधारना मेरा सौभाग्य है और उस पर कुछ पसंद आ जाना आपका सौभाग्य है
हमारे इस सौभाग्य के सिलसिले को कायम रखे दर्शन देते रहे
आपका सार्थक आलेख पढा अच्छा लगा यह मेरा सौभाग्य है

Anil Pusadkar said...

सटीक लिखा है आपने।बधाई आपको स्वागत है आपका ब्लोग की दुनिया में।

शहरोज़ said...

आपके रचनात्मक ऊर्जा के हम क़ायल हुए.आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

समाज और देश के नव-निर्माण में हम सब का एकाधंश भी शामिल हो जाए.
यही कामना है.
कभी फुर्सत मिले तो मेरे भी दिन-रात देख लें.

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/

ज़ाकिर हुसैन said...

बहुत अच्छा लिखा है.
मन को छु गया आपका आलेख.

दर्द-ए-दर्द said...

gajab,
us din photo nahi dekhi thi. aaj dekhi, achchi story.